गरीब कौन?

एक बार की बात है, एक अमीर आदमी अपने बेटे को लेकर गाँव गया। वह चाहता था कि उसका बेटा समझे कि गरीबी कैसी होती है।

गाँव में उन्होंने एक गरीब किसान के घर रात बिताई। वहाँ न तो आलीशान घर था, न बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ, न ही महंगे खाने-पीने की चीज़ें। बस साधारण खाना, खुला आँगन और खेतों में काम करते हुए लोग।

वापस आते समय पिता ने बेटे से पूछा –
“तो बेटा, तुम्हें समझ आया कि गरीब लोग कैसे रहते हैं?”

बेटे ने मुस्कुराकर कहा –
“हाँ पिताजी, मैंने देखा कि हमारे पास एक छोटा-सा स्विमिंग पूल है, पर उनके पास बड़ा तालाब है। हमारे घर के चारों तरफ दीवारें हैं, पर उनके पास खुला आसमान है। हम बिजली से जलते बल्ब देखते हैं, पर वे तारों की रोशनी देखते हैं। हमारे पास खाने के लिए पैक्ड चीज़ें हैं, लेकिन उनके पास ताज़े फल-सब्ज़ियाँ हैं। पिताजी, असली गरीब तो हम हैं, वे नहीं।”

Moral of the story :
सच्ची दौलत धन-दौलत या महँगी चीज़ों में नहीं होती, बल्कि संतोष, प्रकृति और अपनेपन में होती है

Scroll to Top